16 जनवरी 2019 - 13:04
मोहम्मद बिन सलमान के सऊदी अरब से महिलाएं क्यों फ़रार कर रही हैं?

सऊदी अरब को सामाजिक एवं राजनीतिक समस्याओं का सामना है, जिसमें तुरंत रूप से सुधार की ज़रूरत है।

सऊदी अरब से भागकर दूसरे देशों में शरण लेने वाली महिलाओं के 1000 से भी अधिक मामले मीडिया में आ चुके हैं। 18 वर्षीय सऊदी लड़की रहाफ़ अल-क़ुनून ने अभी हाल ही में सऊदी अरब से भागकर कनाडा में पनाह ली है।

सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने देश में सामाजिक सुधारों विशेषकर महिलाओं के अधिकारों के सम्मान का काफ़ी ढिंढोंरा पीटा और महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति देकर मीडिया में भी ख़ूब सुर्ख़ियां बटोरीं, लेकिन यह सब एक ढकोसला साबित हुआ।

सऊदी अरब में धार्मिक अल्पसंख्यकों विशेष रूप से शिया मुसलमानों को भी किसी प्रकार के अधिकार प्राप्त नहीं हैं।

सऊदी सरकार ने दुनिया भर में हो रही जग हंसाई के बाद देश में सामाजिक एवं राजनीतिक सुधारों के बजाए उन महिलाओं को ज़बरदस्ती वापस लाने का प्रयास किया, जो इस घुटन के माहौल से भाग रही हैं।

इसी तरह की एक घटना में अप्रैल 2017 में दीना अली लसलूम ने मनिला एयरपोर्ट पर शरण ली थी। लेकिन सऊदी दूतावास के कर्मचारियों ने हस्तक्षेप करके एयरपोर्ट के अधिकारियों को सऊदी अरब वापस भेजने पर मजबूर कर दिया था।

हालांकि लसलूम ने चीख़ चीख़कर कहा था कि अगर मैं सऊदी अरब वापस जाऊंगी तो वहां मुझे मार डाला जाएगा। वह चीख़ती चिल्लाती रहीं, लेकिन उन्हें लातों और घूसों से मारपीट कर सऊदी एयरलाइन की फ़्लाइट नं एसवी-871 में सवार कर दिया गया।

लसलूम की घटना से केवल एक महीने बाद ही मई 2017 में दो सगी बहनों अशवाक़ और अरिज हमदून के भागकर तुर्की में शरण लेने का मामला विश्व मीडिया में छा गया।

दीना, अशवाक़, अरिज और अब रहाफ़ जैसी घटनाओं से सऊदी अरब में महिलाओं की स्थिति काफ़ी हद तक स्पष्ट हो जाती है।

यह समस्त घटनाएं दो मामलों से जुड़ी हुई हैं। पहला गार्जियनशिप सिस्टम या अभिभावकता, यह सिस्टम ग़ैर इस्लामी है और अधिकांश मुस्लिम देशों में कहीं भी इस तरह से मुस्लिम महिलाओं को पुरुषों की अभिभावकता में बांधकर नहीं रखा जाता है। सऊदी अरब में महिला कोई क़ानूनी व्यक्ति नहीं है और उसे पुरुष की अनुमति के बिना बैंक एकाउंट खोलने या अकेले यात्रा करने का अधिकार नहीं है।  

दूसरे महिलाओं का देश छोड़कर भागना दर्शाता है कि इस देश की सरकारी संस्थाएं महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने में विफल हो गई हैं। एक महिला जो अपने पिता या भाई के बुरे व्यवहार के कारण परिवार छोड़ती है और अगर उसे पुलिस पकड़ लेती है, तो उसे आज़ाद होने के लिए पिता की अनुमति की ज़रूरत होती है। यह सिस्टम का विरोधाभास उभरकर सामने आ जाता है।  

कुल मिलाकर किसी भी देश में सामाजिक सुधारों की बात उसी समय की जा सकती है, जब उस देश में महिलाएं और पुरुष दोनों ख़ुद को सुरक्षित महसूस कर सकें और उन्हें परिजनों या अधिकारियों के दुर्व्यवहार का सामना न करना पड़ा। ऐसी कोई भी घटना की स्थिति में अपराधियों को ख़िलाफ़ अदालती कार्यवाही हो और पीड़ित को न्याय मिल सके।